📰 शरद पूर्णिमा की रात अमृत वर्षा प्रमुख उपाय (25 अक्टूबर 2026)
📅 24-10-2026
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं से खिल उठता है। इस रात की दूधिया चांदनी न केवल सबसे चमकदार होती है, बल्कि अपने साथ आरोग्यता और शीतलता भी लाती है। इसे 'कोजागरी पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है और पश्चिमी दुनिया में इसे 'ब्लू मून' की संज्ञा दी जाती है। चातुर्मास के अंतिम चरण में पड़ने वाली इस पूर्णिमा से ही हल्की-हल्की ठंड की दस्तक शुरू हो जाती है। यदि आप इस पावन रात महालक्ष्मी, चंद्र देव और प्रभु की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन खास कार्यों को अवश्य करें-
1. अमृतमयी खीर का प्रसाद
शरद पूर्णिमा की रात चावल, दूध और मखाने की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखी जाती है। माना जाता है कि इस रात चांद से अमृत की बूंदें बरसती हैं, जो खीर को औषधीय गुणों से भर देती हैं। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में बांटकर ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।
2. चंद्रदोष निवारण और आरोग्य लाभ
कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने के लिए चांदी के बर्तन में रखा दूध चंद्रमा की किरणों में रखें। बाद में इसे भगवान को भोग लगाकर स्वयं ग्रहण करें। इससे मानसिक तनाव और चंद्रदोष खत्म होता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
3. पीपल पूजन से धन वर्षा
शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को पीपल के वृक्ष में मां लक्ष्मी का वास होता है। सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और कोई मीठी वस्तु अर्पित करें। इससे बंद रास्ते खुलते हैं और समृद्धि आती है।